मधेपुरा जिले के बुधनगर गांव में 3 नवंबर की सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने से दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान गांव के ही सिंटू और रोशन के रूप में हुई है, जो सुबह टहलने के लिए निकले थे। घटना के बाद से गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों दोस्त रोज की तरह सुबह-सुबह खेतों की ओर सैर पर गए थे। इसी दौरान बुधनगर-बलुआ रोड के पास लटके हुए 11 हजार वोल्ट के तार की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली विभाग को सूचना दी और आनन-फानन में दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाई-टेंशन तारें काफी नीचे लटकी हुई हैं, जिससे आम राहगीरों और किसानों के लिए खतरा बना हुआ है। पिछले कई महीनों से तारों की ऊंचाई बढ़ाने और उनके रखरखाव की मांग की जा रही थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
घटना के बाद मौके पर पहुंचे बिजली विभाग के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तारों की ऊंचाई मानक से कम थी और कुछ स्थानों पर तार जर्जर हालत में थे। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन ग्रामीणों ने इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना बिजली सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक और उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-टेंशन तारों की नियमित जांच और रखरखाव जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे खतरनाक तारों की तत्काल पहचान कर उन्हें दुरुस्त करे, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और बिजली विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।