मधेपुरा जिले में जमीन की नई न्यूनतम मूल्यांकन दर (एमवीआर) तय करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। जिला मूल्यांकन समिति ने 2 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें शहरी, ग्रामीण और पेरीफेरल (सीमांत) क्षेत्रों का व्यवस्थित वर्गीकरण करते हुए नई दरों पर विस्तृत चर्चा की गई। यह कवायद राज्य सरकार के निर्देशानुसार की जा रही है, ताकि भूमि अधिग्रहण, रजिस्ट्री और मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
बैठक में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति के सदस्यों, भूमि सुधार उप समाहर्ता, नगर परिषद के प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। सूत्रों के अनुसार, समिति ने पिछले वर्षों के भूमि मूल्यों, बाजार दरों, स्थानीय विकास कार्यों और जनसंख्या घनत्व के आधार पर तीनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग मानक तैयार किए हैं। शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक और आवासीय भूमि के लिए ऊंची दरें प्रस्तावित की गई हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि और आवासीय भूमि के लिए संतुलित दरें तय करने पर सहमति बनी है।
पेरीफेरल क्षेत्रों, यानी शहर के बाहरी हिस्सों और ग्रामीण-शहरी संधि क्षेत्रों, को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे अर्बनाइजेशन और सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को देखते हुए मूल्यांकन दरों में उछाल की संभावना है। समिति ने स्थानीय निकायों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर कुछ गांवों को पेरीफेरल श्रेणी में शामिल करने पर भी विचार किया, ताकि भविष्य में भूमि अधिग्रहण में किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
जिला मूल्यांकन समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई दरें न केवल राजस्व वसूली को बढ़ाएंगी, बल्कि भूमि विवादों में भी कमी लाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित दरों को अंतिम रूप देने से पहले आम जनता और संबंधित हितधारकों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए जिला प्रशासन जल्द ही एक सार्वजनिक सूचना जारी करेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। समिति ने तकनीकी समिति की रिपोर्ट का भी गहनता से अध्ययन किया, जिसमें विभिन्न मौजों और थाना क्षेत्रों के भूमि मूल्यों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि मधेपुरा जिले में जमीन की नई न्यूनतम मूल्यांकन दरें आगामी वित्तीय वर्ष से प्रभावी हो सकती हैं। इससे रजिस्ट्री शुल्क, भूमि अधिग्रहण मुआवजा और सरकारी भूमि आवंटन में एकरूपता आएगी। समिति ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में भूमि के वर्गीकरण का अंतिम सत्यापन शीघ्र पूरा करें, ताकि समय पर अधिसूचना जारी की जा सके। इस पहल से जिले में भूमि प्रशासन में सुधार और राजस्व में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।